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॥ श्री परमेश्वर जी सत छै ॥

पातावतांरी ख्यात

ठिकाणा आऊ · परगना फलोदी · मारवाड़ (जोधपुर राज्य)
Khyaat of the Patawat Rathores — Thikana Aau, Pargana Phalodi

अभिलेख स्रोत विवरण Archival Source — Confirmed Readings

The following details appear on the cover page of the scanned manuscript and are read with reasonable confidence. पुष्ट पढ़त / Confirmed Reading

दस्तावेज़ का स्वरूपहस्तलिखित ख्यात / वंशावली (अनुपंजीकृत प्रति — “अपुरां अभिलेख”)
मूल स्रोतराजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर
प्रति / स्कैन स्थानमहाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, जोधपुर
बस्ता नं.12
ग्रन्थांक नं.61
बही नं.92 अंक पुष्टि करें
पृष्ठलगभग 16–17 हस्तलिखित पृष्ठ (स्कैन में 32 चित्र)
ठिकाणाआऊ की ख्यात — परगना फलोदी
स्कैन विवरणCamScanner, 17 सितम्बर 2024

दस्तावेज़ में सम्मिलित सामग्री Contents as Listed on the Index Page

अनुक्रमणिका पृष्ठ (परगना फलोदी — गांव आऊ) पर निम्न सूची अंकित है: पुष्ट पढ़त

  1. फ्रायल पेपर (Trial/Title Paper) — 1
  2. ख्यात बही — 10 पत्र
  3. गांवां री नकलां — 6 पत्र शब्द पुष्टि करें
  4. पीढ़ियां री ख्यात रो पानो — 1
  5. घटीयाला री पीढ़ियां री विगत रो पानो — 1 स्थान-नाम पुष्टि करें

ख्यात की विषय-वस्तु का सार Overview of the Manuscript Body

मुख्य पाठ पारम्परिक ख्यात शैली में सतत कर्सिव मारवाड़ी देवनागरी में लिखा है। इसमें पातावतांरी ख्यात — विगत तफ़सीलवार शीर्षक के अंतर्गत पीढ़ी-दर-पीढ़ी विवरण दर्ज हैं — विवाह (परणीजी), गोत्र, रानियों/ठकुरानियों के पीहर, गाँव-जागीर के पट्टे, तथा प्रत्येक पीढ़ी के पुत्रों की क्रमांकित सूचियाँ। पाठ में “महाराजाधिराज महाराजा श्री मानसिंह जी” (जोधपुर) का उल्लेख आता है, जिससे यह अभिलेख मारवाड़ रियासत-काल से सम्बद्ध प्रतीत होता है।

The body is a generation-by-generation chronicle in traditional khyaat style: marriages, gotras of queens, village grants (pattas), and numbered lists of sons in each generation. References to Maharajadhiraj Maharaja Shri Man Singh Ji of Jodhpur situate the record in the Marwar princely period. The final leaves include copies (nakals) of what appear to be official parwanas/orders bearing the full royal titulature of Jodhpur.

पढ़त की स्थिति — पृष्ठ अनुसार

आवरण एवं अनुक्रमणिकापुष्ट — स्रोत, बस्ता/ग्रन्थांक, ठिकाणा आऊ, सामग्री-सूची स्पष्ट पठनीय।
मुख्य ख्यात (सतत गद्य)आंशिक — शैली, ढाँचा व अनेक शब्द पठनीय; परन्तु व्यक्तिनामों की शृंखला बिना विशेषज्ञ मिलान के अनिश्चित।
पीढ़ी-सूचियाँ (क्रमांकित)आंशिक — नीचे दी गई तालिका देखें; प्रत्येक नाम की पुष्टि आवश्यक।
परवाना/नकल पृष्ठ (अंतिम)आंशिक — राजकीय उपाधि-पंक्तियाँ पठनीय; तिथियाँ व आदेश-विवरण असत्यापित।
घना धुंधला/कटा भागअपठित — कुछ पंक्तियाँ स्याही फैलने/स्कैन छाया से अपठनीय; मूल बही से मिलान अपेक्षित।

प्रारंभिक पढ़त में मिले नाम — पुष्टि अपेक्षित Tentatively Read Names — All Require Confirmation

नीचे केवल वे नाम दिए गए हैं जो क्रमांकित सूचियों में तुलनात्मक रूप से स्पष्ट लिखे हैं। प्रश्नचिह्न (?) वाले अक्षर अनिश्चित हैं। कृपया किसी भी नाम को तब तक अंतिम न मानें जब तक परिवार के जानकार अथवा मूल अभिलेख से मिलान न हो जाए। सम्पूर्ण खण्ड अनुमानित

एक पीढ़ी-सूची (सात भाई) — मध्य भाग के पृष्ठ से

  • १. डुंगोजी (?)
  • २. लूणोजी (?)
  • ३. हमीरजी
  • ४. वंशधीरजी (?)
  • ५. जगनाथजी
  • ६. जलपजी (?)
  • ७. वीसलजी

एक अन्य शाखा-सूची — “…रे इश्वरां री विगत नफ़सीलवार”

  • १. रामसिंहजी   २. मानसिंहजी   ३. जीवराजजी (?)   ४. नाराजजी / नारायणजी (?)

दासजी-शाखा सूची (नौ नाम) — मध्य भाग

  • १. दूदोजी   २. इसरदासजी   ३. जगबोनदासजी (?)   ४. नरहरदासजी   ५. मनोहरदासजी
  • ६. हरजेरामजी (?)   ७. जगजीवनजी (?)   ८. केशवदासजी (?)   ९. बीरमजीपजी (?)

अंतिम पृष्ठ की सीधी सूची

  • जोधसींघजी (?) · इंदरजी/इंदरसिंहजी (?) · सगरामसींघजी · नगसींघजी (?) · मोकमसींघजी · जुगतसींघजी · बख्तसींघजी (?)

बेड़दासजी-शाखा — “…री एण बेड़दासजी रे कुंवर री विगत”

  • १. यावलदासजी / जावलदासजी (?)   २. अणदासजी (?)   ३. रूपसींघजी (?)   ४. खिड़ूपजी (?)

Names marked (?) have at least one uncertain character in the cursive hand. No name above should be republished as verified fact until matched by a family expert or against the original bahi.

पुष्टि की प्रक्रिया — तथ्यात्मक प्रमाण सहित How to Verify — With Factual Evidence

जानकारों से मिलान: ठिकाणा आऊ (परगना फलोदी) के परिवारजन एवं वंश के जानकार बुजुर्ग इस प्रारूप की प्रत्येक पीढ़ी-सूची को अपने पारिवारिक अभिलेखों (बही, पट्टे, पुरानी वंशावलियाँ) से मिलाएँ।
मूल अभिलेख से सत्यापन: राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर में बस्ता 12, ग्रन्थांक 61 के मूल दस्तावेज़ से पढ़त का मिलान करें। जोधपुर स्थित महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र में भी प्रति उपलब्ध बताई गई है।
प्रमाण सहित सुधार भेजें: कोई भी संशोधन बिना प्रमाण के स्वीकार नहीं होगा। सुधार के साथ मूल बही पृष्ठ का सन्दर्भ, फोटो, अथवा पुष्टि करने वाले जानकार का नाम व सम्बन्ध अवश्य भेजें।
अनुमोदन के बाद ही प्रकाशन: जब तक कम-से-कम दो स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि न हो, यह पृष्ठ “प्रारूप — पुष्टि अपेक्षित” स्थिति में ही रहेगा और खोज इंजनों से बाहर (noindex) रखा जाएगा।

No correction will be accepted without evidence: an original bahi page reference or photograph, an archival citation, or attribution to a named, knowledgeable family elder. The page remains in draft (noindex) status until at least two independent confirmations are received.

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