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॥ श्री परमेश्वर जी सत छै ॥

पातावतांरी ख्यात — सम्पूर्ण पृष्ठ

ठिकाणा आऊ · परगना फलोदी · मारवाड़ (जोधपुर राज्य)
Complete Page-by-Page Draft — Khyaat of the Patawat Rathores, Thikana Aau
संकेत-सूची: पुष्ट स्पष्ट पठनीय अनुमानित आंशिक पठनीय — पुष्टि करें अपठित पढ़ा नहीं जा सका (?) = अनिश्चित अक्षर/शब्द 「…」 = अपठित अंश

पृष्ठ-दर-पृष्ठ प्रतिलेख Scan-wise Draft Transcription — 32 Scans ≈ 17 Manuscript Leaves

स्कैन १ — आवरण / अभिलेख सन्दर्भपुष्ट
अपुरां अभिलेख
मूल — राजस्थान राज्य अभिलेखागार (बीकानेर)
स्थान (स्कैन) — महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, जोधपुर
बस्ता नं. 12 · ग्रन्थांक नं. 61 · जि./जो.–96 (?) · पृ.–366 (?)
रजिस्टर नं. एबी (?) · ६१/९२ · बही नं. 92
ठिकाणा — आऊ की ख्यात

आवरण पर अंकित संख्याएँ “12/61” अभिलेखागार की बस्ता/ग्रन्थांक प्रणाली की हैं; शेष अंक कार्यालयीन क्रमांक प्रतीत होते हैं।

स्कैन २ — अनुक्रमणिकापुष्ट
ख्याति नं. 1/3 (?)
परगना फलोदी — गांव आऊ
१. फ्रायल पेपर (ट्रायल पेपर) — १
२. ख्यात बही — १०
३. पट्टां (?) की नकलां बही — ६
४. पीढ़ियां री ख्यात रो पानो — १
५. घटीयाला री पीढ़ियां री विगत रो पानो — १
पृष्ठ सं. १६
स्कैन ३ — कच्चा/काटा हुआ पृष्ठअनुमानित
मालम ३६ (?) · 「काटी गई पंक्तियाँ」
「श्रावण/शाके… सुदी… (?)」 — काट दिया गया
「गढ़ पट्टी वाली/गादमरी पाली (?)」 — काट दिया गया
गांव आऊ — जागीरदार (?)

यह पृष्ठ लेखक का कच्चा मसौदा प्रतीत होता है; अधिकांश पंक्तियाँ जान-बूझकर काटी गई हैं। काटे अंश प्रकाशन में सम्मिलित न करें।

स्कैन ४ — ख्यात पत्र १ (मुखपृष्ठ)अनुमानित
॥ श्री परमेश्वर जी सत छै ॥   (पत्रांक २)
आऊ
॥ पातावतांरी ख्यात आऊ री तफ़सीलवार
(टिप्पणी: पातावतांरी ख्यात — तफ़सीलवार)

विगत श्री इंदोजी (?) रे 「…」 हमारो जुद्ध है जी (?) एक ही पीढ़ी में 「…」

प्रविष्टि १ अनुमानित

१. रावजी श्री यीहोजी/सीहोजी (?) रन्नो जसंख्या (?) पातौ श्री जी न (?) मालरा ब्रांम (?) एण ने सुपीर (?) सोलंकियों ने परणीया पड़े पाठा (?) कुंओ जगया गोयदांण ए गढ़ राजड़ी यो (?) श्री गोड़ ब्रह्म (?) एण ने गुर श्रीया राणंडा (?) रो गोत मगो चाबुरसाबा (?) परवर तीन जज़र खेत (?) खुजदेजी (?) न के म्बर (?) वगैरे गोतरां वांस (?) पैणो वीसतारे 「…」

प्रविष्टि २ (प्रारम्भ)

२. आसथांनजी (?) रुनोजस (?) आगलनानायें पुत्र एवं एन (?) रही जी ए खुरी सायने (?) मारवाड़ में पाजी आया ठएरा (?) ते गीरा सीया पाजी (?) रो वीत लेजया (?) सुखर्जा (?) यो जद पट्टी वा (?) 「…आगे स्कैन ५ पर」

यह ख्यात-गद्य की विशिष्ट शैली है — प्रत्येक क्रमांकित प्रविष्टि एक पूर्वज का नाम, विवाह (गोत्र सहित) एवं भूमि/गाँव विवरण देती है। नामों की शुद्ध पढ़त के लिए मूल से मिलान अनिवार्य।

स्कैन ५ — ख्यात पत्र १ (पृष्ठभाग)अनुमानित
「…」 जाडंएं रघुनंगे राव (?) श्री पाइणा (?) रो बंदोबस्त खरदीपो (?) पर घोड़ा आदमीयां (?) रो बल वद गयो जद तो वुहीन ई विड जाय (?) भावखीयो (?) ने वणा (?) रो परधान मार्वी (?) आसोज आयने (?) माजी पीलष्षे पो (?) मीरा शाल ब्रा (?) रराजन रो लेवो जद (?) रावाल नीनजीव (?) एणा गोयल दो (?) मुननापा खुदो (?) लुजएंानु भार राजन रो (?) जी यो जद 「…」 वात चली आवे छै (?) रावाल नीन गोयल (?) जीव एण 「…」 गांवां खुवेण (?) ने कुंवजोश (?) रली जोड़ें रखोट (?) जाई सोनगन (?) दीरा काय (?) ने बेटाला खां जह (?) वार कुंवर भी कुंवजोश (?) रायो सो वाले लारां नाजिए (?)

विगत (उप-सूची) अनुमानित

१. आसथांनजी रा तो वंश व (?)
२. सोनंगजी रा इड़ रखनी ई ड़रीया वाजे ए (?)
३. अजरा वले जाड़ ठी जक्ष खुड़ देवड़ (?) 「…」 मड़ि (?)
   वावड़ा नी घमसे ढेरो मायो वड़ देवी नच (?)
   रायो जवाड़ 「…」 राजजामी यो खु वामला वाजे ए (?)
(पत्रांक — २)
स्कैन ६ — ख्यात पत्र २ (अग्रभाग), पत्रांक ३अनुमानित
३. छूहड़जी (?)आसथांनजी र पारखेण (?) गोरवा वर खुनेजी (?) यथाणो घाजी (?) यो रजर भेरां न झर वीपा (?) भाएदे वैरोभ (?) दरने वावड़ी (?) जिणरो रास्म बेल्व (?) गुगांने छ ई अगड़ो इर सं (?) भजाय (?) — आज भारा रा गांव (?) पीक्षगएरी जायगाग (?) नीमोरी शोज चाई चोक्षि (?) घणी दलमारी यो जद रूपं (?) क्षो गएा वाजी (?)
४. रायपालजी — रो बवत मश्र (?) लज्यान बपड़ीया छ (?) रंपतनु परवरस्त क्षर (?) पाजी जीए क्षगही रलाए वाजीयों (?) देववसी नारी वंदन (?) पश्ुने 「…」 रोनी वहेई (?) औ सोम्वं दरवं अरारोड़ी पावार ग्वाजे ए (?) न एण सा (?) गीखु दीयाड़ करण्ए (?)
५. रूनपालजी (?)रस्व मरोजन पर्न् ग्ग्रेपे पारखे हे तन (?) रुइ ध्रमु राजापक्षव (?)
५(क). रावजालएसीजी (?)नंकीक्षुरामातरो घणी (?) ल च्वो चोखुदील (?) वनमें श्री धारगयाजंग्वे शुरु घने ग्माश्री (?) पिश्रे लिरो (?) ब्रोई प्रलपुलनतोड़जो मती सोनएरो श्लासां कां तेहील (?) 「…आगे स्कैन ७ पर」
स्कैन ७ — ख्यात पत्र २ (पृष्ठभाग)अनुमानित
「…」 जद रूड़े जेसो रांन पर गया सोरोन पर ऊंचा रखावले दभीणा (?)

६. रावकलो/रावकल्लोजी (?) — गोयलांरो लांएण जविण ने जालण (?) मीजी (?) जत सोभेरी वघर वूपोक्षिमी रंगपर रुं श्रीवो (?) छ (?) पुरोमारीजीपो नहीं वारी ह क्षिरं साराय लजी जे जद्द (?) एिड़ साणं रुम्तारायो प्रिरलाटी पोनि भजान रत्रीयां (?)
७. रावतीसिंव/रावतसी (?)कुंसायरो घणी कुनोनिकीन माजा में (?) राजस्थान जमायां रंगोरे जमश्कर घणी होती (?) ही दव्व्लंक वस्तुजीए मुरलां रोनोव तीरोजी क्यो (?) आपीएंश्रीहिइ च्येज़ल्लीयाजीए वरम्ती रुघणे (?) आयोजीए भूती हिनी क्ष्वायार श्रीवांएा घ्रिल्री (?) (हाशिये में: बित जी वाऊगृह / सौ में (?)) एजस्रात लनुपर च्रलनान दीनृजाया — १३५ में (?) जगे च दतें गयानगे क्षमजाया (?)
८(?)। भजाघोजी (?)चवांए राली एन ब्राजं क्षींषितीर (?) एुक्षेट वगेरसंइ वर्जीएिनीविण (नजाड़ाए) (?)

९(?)। वीरमजी (?)वरोत्रनवीक्षवाजो यांवारीमजो यंकि (?) रुगड़ोइर क्षोभजाया (?)
स्कैन ८ — ख्यात पत्र ३ (अग्रभाग), पत्रांक ४अनुमानित
कुंभोजी — वीरमजी रे देवेली कुं हुए पर मारवाड़ ने गांव (?) वालांक आले वारएं रे पर रेटो अरख्व रापा पड़े (?) मलीनाप्पजी वुने में वेमेगपा: खुएंसालोड़ी रो (?) यांएंगहिपो: पड़े यांरुजी री ग्रपा कर स्योइढ रानडु (?) गांरीभ ददरवुं मंगेवर रो राजलीपो: वक्षाबूरामलीठवा (?) नागोर में राजधानी बांदे भ्रकीवर 「…」 ईरि मेलीपो (?)
रीड़मलजी — बुड़ो झीरे हृश्मयुरान क्षोटानारद्दाने (?) नेठेगापर्सएो जीएिंदृिष्ठर बूनेगपा कुएं सेंगेवां सुदृएा (?) जोपटेदीपो: पड़े ब्रूनोरे मरएो बाद: मंगो: नरबदवां (?) रांवूलायुं मं रोवर ब्रापयोएो लेआापुराजड़ीपो: पड़े (?) श्री तोड़ाप्पेरांएोजी क्षिएां ने वुरं वुरायो औीरइ (?) एो सेखेटार्से कुंवा वीगत नफ़सीलवार (?)

रीड़मलजी(?) रे कुंवरां री विगत — उप-सूची अनुमानित

१. जोधोजीतोजी घडर वसपि 「…」 वएराने ०दे रे (?)
२. अखेराजजीरा वंशरा: नगावन: क्षेपावु रहे (?)
३. रूपदलजी/खुंपदलजी (?)रे वंशारा वीड्डनेरा वुदु: नादरावगेरे में है (?)

यह खण्ड ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है — नागौर, राजधानी, तथा राव रीड़मल एवं राव जोधा से मिलते-जुलते नाम आते हैं। मूल से पुष्टि के बिना ऐतिहासिक समीकरण न जोड़ें।

स्कैन ९ — ख्यात पत्र ३ (पृष्ठभाग) — वंश-सूची क्रम ४–१४अनुमानित
४. नाषरजी रे बेटो खालोजी एारे वंसरां बाध है (?)
५. अरड़मालजी रा क्षाए मालो नरा गेड़ है (?)
६. मंडलाजी रे वंशरा मंडला रा गेड़ वीरु नेरॉमियां है (?)
७. मांडणजी पलंगएो रा नड़ीपो ड्डी अरचापरामंगे — एा नरा गेड़ है (?)
८. बांषोजी क्षापउड़ेरा नड़ीपो इएंगरे वंसरा (यो पावुगे) (?)
९. बेराजी रे वंशरा बेरावगरा गेड़ है (?)
१०. दुपाजी रे वंशरा रुपावगरा गेड़ ठवा (?)
११. पातोजी वोटीले रा नड़ीपो इएारे वंशरा पानगव नरा गे है (?)
१२. नगपालजी इणरे खेटोषेनसी बंधर्षी रे वंशरा — षेनजी हो रइरी ने (?)
१३. नगमाल — रेनोजरान इएारे वंशरा नोनरा नोग है (?)
१४. वुरएं — इएारे वंशरा धुर (लोग) (?)

यह सूची प्रत्येक पुत्र के वंशजों की पहचान (“…रे वंश रा … गेड़ है” — उनके वंशज अमुक शाखा कहलाते हैं) बताती है। शाखा-नाम विशेष सावधानी से पुष्ट कराएँ।

स्कैन १० — ख्यात पत्र ४ (अग्रभाग), पत्रांक ५ — क्रम १६–२४ तथा पातोजी-खण्डअनुमानित
१६. सांडो — इएारे वंसरा सांडुवा नरा है (?)
१७. नाप्पो — इएारे वंशरा नाप्पावग वीड्डा नेरी में (?)
१८. ऊदो — इएा वीड्डा नेरी में गांव ऊदाप्पा वंसा पो (?)
१९. बेरो — इएारे वंसरा बेराव रा इएारे (पचोउड़े ऊज्प) (?)
२०. हापो — इएारे वंसरा हारा नरा गेड़ है (?)
२१. अजुवाव — इएारे वंसरा में उने गाल्रो जाइमेरे (?)
२२. सावर — गेटोध क्षोदएा जेरनालावुमे रुवमुवो (?)
२३. गोयंद — नांगोप्पड़ो अंगेरी नीयारीन दमुवो (?)
२४. रूसवंद ने सीनयानी सरी अदमुवो (?)
२५(?). भागगोजी (?)

विगत पातोजी री — इणसूं नव(?) अनुमानित

१. पातोजी निरखजी जो षोजी नारावुर गेखबीटीले (?) पटेदिपो सोइएंग नापयोरी लेमेरा जड़ीपो — १५२० (?) रावे साषष्ट गेच्औरि ए वारसगांइगो ष्वेरी (?) ते राजड़ी यो औीरि ए वुरसवुरण जेरा जड़ीपे (?) 「…आगे स्कैन ११ पर」
स्कैन ११ — ख्यात पत्र ४ (पृष्ठभाग) — पातोजी/जोधोजी-खण्डअनुमानित
और रीड़मलजी ने युवुवी गोप्ठ वोजगे जोपाजी (?) गलेटीरामे लांयुगापा सोगेरी उमलजीने वुक्षु ल (?) वारीष बर्खुएंजो घोजीनी सारी पांक्षोर जोघे (?) जीपागाजीने ऊएवघर जापड़ुही ऊः नीवजी (?) डुंगावन्ने नगग वेगपीए वेगोदाफुरीमनवालमे (?) यूगासोन्गगेनहीजद्पातोजी आपड़ुही वेतोनधि (?) पेअवेगहेः जद मिदोजीपिगेंनाप देषेगो सावेइ (?) चवेतपाः सोग्रेगोनीयरीपासोड्डुपासनएआपा (?) जीसोदीपावांिआपाः जगेरुगजेनरु वोदोतरर्छा (?) दमीवुांमआपाः जगे पातोजीरे घावलागधसुल (?) (हाशिया: वुल्लंज्ञापा (?))
जोधोजी मंखिव षोरूवोः नागवुगपाः ड्डयु शेनेजे (?) मार्वाउ ऊपरगांवे रु ग़डां रायर आवेनही ः जद हरत (?) जीने पातोजी (ऊपर: राधूनोज (?)) जाप ड़ुही क्ष घेपीरहो नेजोदोजीमे (?) विघोहुआो ड़ोइआंगुनवागड़ुहीः नदहरनमजीरे (?) एंगमाघनोदोजीने घुलापाः मजीटरीलाप्रुक्षीरहा (?) रवमवाइः जीरवुंपोऊ पोषेरमेमांरो जीमएरनीजगा (?) गाइष्पारीप्रूतकंतीः जोदोजीणगेयूनीड्डलीपाः सोगोत (?)
स्कैन १२ — ख्यात पत्र ५ (अग्रभाग), पत्रांक ६ — सात कुंवरों की सूचीअनुमानित
खेरा वेअगयराव त चुणेरी घोड़ी षोले राणाजीर (?) एा क्षार भारवुलने इवजोड़ीपोतागोर बेदगीपोघेष (?) (ऊपर: राधूवाक्रेनोजी (?)) गोजीहरालेप्पाः क्षोर पातोजी रिक्ष वर (?)

विगत नफ़सीलवार — (पातोजी रे कुंवर) अनुमानित

१. डुंगोजी (?)    २. लूणोजी/लुंबोजी (?)
३. हमीरजी    ४. वंषधीरजी/बंसीधरजी (?)
५. जगनाथजी    ६. जल्पजी/जालपजी (?)
७. वीसलजी

हमीरजी-खण्ड (प्रारम्भ)

इछीर हमीरजी रे खेराएं मेरननजी री वीगगन्गोर (?) रत्नन्ची: हमीरजी पेल्वागो रा वजी जोद्योजी इने (?) वाक्षुरी ड्डी वीपड़े रावसा गतखजी रेणाप्पे गांवड़ो यो (?) एयामन नड़ठैप् रावेन ष्ठेजमीर छड़ु लीअम्भोर (?) यांनार रेमाबो पास्युं पीपाइरीती ज्िएीपो पड़ूड़ीजद (?) राड़कइ जगेच एो आबो लड़ीपोच्याव्रा पड़ीपो यो (?) ओ इ ड़ी गाबमे नोलिषे हे वुे ऊगेइगो ही ड्डोमरूापोने (?) प्रेछाही लिपे वुे रएने जमान रायोमी ऱुइलेग पाप्यो (?) 「…」
स्कैन १३ — ख्यात पत्र ५ (पृष्ठभाग)अनुमानित
षोपायापीड़ वोद्पावसाजा ड्डीपासोपाबाप्वरेल्ग (?) पाप्यापड़े मरीपार्एएंरेवेराएंगोगोजीः परनापनीरत (?) नर्ज़ूी: सोगोजी (हाशिया: २ उनवरऔगे (?))
औीरदान सिंह हमीराग: पेल्वागो रावखुंनोजीरिवुने (?) रर्मो सोम्रुनोजीरिखोरूनपटेघीक्षोरशालीरागां वांगड्ड (?) हजड़ोप्पोः सोसोरून रोबिएरानीअं चेरीपोगोरखोवे (?) रवडीया जगेरतनलीपनी साघेप्पाः खुनोजीप़ाव (?) (ऊपर: क्षोगोनी (?)) पड़ीपानदुरएंाक्षष्टरीघएीड्डीवीक्षीगर नकजीयजी (?)

उप-सूची

रिड़वार: प्रांचेज़ी: श्रीड्डंगएदप्पजी: नेमवजी ऽव्ड़ प (?)
छीरजी: प्पा (?)
द्विलाणदासजी(?) रे पेल्वागो रावजी माल्वदेवजी क्षीगेगो (?) जीवुनेहमगीररपाः क्षीरदृरूगाना माल्वदेवजीलीपा (?) जगेधएगराड़ाड्डीपाध्या क्षिोर दृरुख्वोमएीपाली (?) राड़कुइज्वे ड्डास्ट्रापाएोरड़ीचांएादासजीरिख्वर (?) ण्ड्डरएंराजवुीरयो नेगववुसापोजीएएंगवुरोनां (?) वृक्षाएुदीरीज़ीयो औीर वीसदें भैड़तीयो नारानऊेष (?) टीजीजेएयावादएांने ए्वायोः छाष वररावज़ीदुए (?)
स्कैन १४ — ख्यात पत्र ६ (अग्रभाग), पत्रांक ७(?) — वीरमदे-खण्डअनुमानित
५०० हजार रो जलेमुश्रा बलेवास्ने गपाक्षीर जेगारण (?) रोगांवमुभिचगीररी क्षुनेदोनुशेजांनमांऊर क्षीरबाद (?) घानेवरुछान सोवऊरो ड़े १ मुगी बाजरी रेवास्ते (?) बादमापन रीफनजनलख्योइ क्षीरवीरम देने वृलाप (?) बादसाअशील न्नो दियो वेआपं देमेड़ीलावुे घो वुेने (?) आवुर हीदूसप्यांनां रेरपासगांषरन हीआन्िगः नद (?) वीरमदेचारजड़ीवीवुे आप क्षोरवानरो ष्रीवुर मनक्षरो (?) भिवानोइवानोंमरावुमाल्दै नीलेनागदेऊलानद (?) वीरमदे एुदंगल षलेड्डीपो वुे नादाक्षीम्न देढाजे (?) घरीदीक्षीर वुएंाबगोरीगादीपोमि शारदीक्षोघ रोघ (?) घुरमांए िरदार भारवाड़ वालांरे तांवैश्एमजमुन्क्षे (?) लीषाघाड़े अरजीघारीच्याइः क्षीरपेलिष व्हिृसव जी (?) नेपवूलाप देमांरीमुलायने ऊंप लिषानागाहेढुेच्च (?) वापदोवुीपोणो घुरोड़ीयोंखुं वघारोपटोदेलांइएंगोरर (?) ल्िषयीव दिपा क्षीरबादमाइर्ष्ठि रीपोरोंभरीद्मारवाड़ (?) रीप्रांम्मेपेलीथि नादष्पाभारी बीजांइघ्क्षीपसनेवेय (?) दीवीः च्िपोमार वाड़री घोनमोिर दांरजेगेजीः वुंपोनी (?)

इस खण्ड में “वीरमदे” (सम्भवतः राव वीरमदेव) तथा बादशाह से सम्बन्धित वृत्तान्त है — मेड़ता/मारवाड़ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक प्रसंग से मेल सम्भव है, पर बिना पुष्टि समीकरण न लिखें।

स्कैन १५ — ख्यात पत्र ६ (पृष्ठभाग)अनुमानित
मीरां राड़रामो: व्रुद देषष रीदीघी नेह एांनेमोड्डीत (?) वुरीषवरोनहीघीः पड़ें वीरमदे १ दिन बानेरानरा (?) रावजीवुनेआपो क्षोरअरजड़ीवीवुेभारीगेआपरो (?) रीज्वनइरदिवीषी जदइगोबुं (ऊपर: गुहेरे (?)) आपोड्डीपोवीएका (?) आपरेच्चीरदार दीरोरीगो बलु नेआप नेपड्डड़ावे (?) हेपोआपसाबनहीपोंनोगो आपरेपरदारोंल्वि (?) ढाजोंषरीदीहजीएोरे टावोंरीगीदीपोजे बादएाह (?) घुरमांए हेपोआपनीरएोदुरावे । नदरावजीनिप (?) ब्रोखेमंषड़ोठवाआोर खीदांरोहीावांमेगापदेवे (?) गोघुरमांएदेघीपाजीएयुंरागोरानरावनीलो (?) नीप्रीपाःजद ट्विांएदापजीरावजीने मनेड्डी (?) यांप्यावुे मारवाड़रोगुवार नीयरनघवुलीः परररावे (?) जीगोनीवरी पासोयीवांएेआपानदस्तड़ीजांए (?) वुंयजीयाप्येपाः क्षीरन्रु०° हजाइरवारावुनगोरी (?) वुंपोनी बादयाशीश़ोजए वस्रोनारीरुगड़ोड्डीवुो (?) नेकान मवुंमक्ष्ापो — ५०० राकाहवर (?)
स्कैन १६ — ख्यात पत्र ७ (अग्रभाग), पत्रांक ८(?) — द्विलाणदासजी रे कुंवरअनुमानित

उप-सूची अनुमानित

और द्विलाणदासजी/किलाणदासजी (?) रे कुंवरां री विगत नफ़सीलवार:
१. रामसिंहजी   २. मानसिंहजी   ३. जीवराजजी (?)   ४. नाराजजी/नारायणजी (?)
रामसिंहजी ड्डीरएएंदु गांव घरीपान्वी आपा — (जमा) ५३र में (?)
रामसिंहजी क्षील्गंएणदास्योर पेल्वागोरावबंद्रषोएाजीदुनेनांड़री (?) मिरयाःपबेमोराराजान करेषिं घनजीरिजोदृछुर्ख्यापोगेनदरोमघीच (?) जीघणी बदरीड्डीवी क्षीरइएंारेप्रलोदीपटेघीनद राड़ोरुगड़ो (?) भेमजबुनरपाघाःपड़े बिृांएणुलेरापमगोरुऽपरशेजलेवाद्मा (?) रेठ्दमखुे ुेदेाषिंघनजीगपानरेरोमघीघनजी शिनजेएाघेघाक्षीर (?) मिवांएोड्डापमड्डीपोजगेऊेनरादोमोरक्षोइएांरेनुभेघो पहुेण (?) जीयानारीयोंवुरूजीचोगेंघरीपालीभाघेरांजीवासोदिपो (?) जगेरोमक्षिंघजी ड्डिवुरांसमेनवाजनेड्डेमआपयएामनन्रु ५५२र (?) वाएमेक्षाराड़ रुइ अएिइएंरिख्वुरोरीवीगन (?)

उप-सूची — (रामसिंहजी?) रे कुंवर अनुमानित

१. दूदोजी   २. इसरदासजी   ३. जगबोनदासजी (?)   ४. नरहरदासजी   ५. मनोहरदासजी   ६. हरजेरामजी (?)   ७. जगजीवनजी (?)   ८. क्षेत्रपालजी/केशवजी (?)   ९. बीगारूपीषजी (?)
(टिप्पणी: क्षमएारदार ऽर क्षीरख्वर ६ क्षामआपो (?))
स्कैन १७ — ख्यात पत्र ७ (पृष्ठभाग) — इसरदासजी-खण्डअनुमानित
इसरदासजी नीरांमजीपनीभुनववर गावुराबीपोछगोरं चार (?) ख्रीषा पयरीगावमें आसवुरएा बंद्रषोएोगरे चोपार भगोक्षिया (?) बोल्वरूप गाभगेल वोजर्ने ड्डुएां रेहीड्डिटांरीरी लागीर्घीपबेनी (?) रगपाक्षोरइएां रेख्वुर ५ वाक्षवावीगन (?)

उप-सूची — इसरदासजी रे कुंवर अनुमानित

१. किशनदासजी   २. नागवंददासजी/नागरदासजी (?)   ३. राजसिंहजी   ४. सुनाणजीपजी/सुजाणसिंहजी (?)   ५. नेतसिंहजी (?)
राजसीघजी इसरदाक्षोर क्षीहिंनी बादमाइनेनांड़रीनेगापा (?) माहाराजस्री ई हिविघनजीर्रे याप्पेनजीर खुावन कवर ड्डायं (?) नयीअजी उएाजरसिमें उग्घ्यो पीकोइ ड्डिबान मव्ल्े (?) ईर्एिरिश्रीयाद हवीजेट ख्वर ड्डायंनसीघजी ब्लेवुड़ (?) रावरएामें पारीलीनी उएामीशीखु रुपावेगांपानोवं (?) नोरआपरएिविर वाव्रएीयाम्रु हवीयो ड़र्इवारमोटी (?) प्रारएगप(क्षीर सेघनड्ड वीहै सजरमीघनीक्षीर (?) चीक्षमपारमं ई ३ ई वीबि हृ्छ ख्वरड्डायंनसीघरु (?) पावनने पामावन खुरसीघरी मारनि घरीपाबीआपा (?) क्षीर रानसीघनरि कनेरॉरीवीगन (?)
स्कैन १८ — ख्यात पत्र ८ (अग्रभाग), पत्रांक ९(?)अनुमानित

उप-सूची अनुमानित

(राजसिंहजी? रे कुंवर) — १. बागसीघजी (?)   २. नारायणदासजी — रएॉरगॉव चारी परिहरच्वी (?)   ३. खुरसीघजी (ऊपर: पाल्वा / वागयोच (?))   ४. कीषमीघसजी (?)ड़ीएा भेररदमलं (?)
वनसीचजी खुरसीघजी गिदैंनु नाई माहाराजश्री खुरसी (?) घजीरीबंदगीभेंप्पा ेगीरबादमा खुरजीघजनिग्भारारीपो (?) जीघीपीजरिआगजीहवीजीणघंजिहरी वरपा चीरइएांरा (?) नाइनिरायणद(यजील्ली सैांफवष्प (?)
रीएब्रोड्डदाप्पजी माहाराजस्री यर्बसीघंजीइनिघपीर्षि (?) दर्यार्वांष्ठरी गीरस्तं कारीखुगनाप्पे गीरूगर्बसीघजीछ्व (?) रघदिंप्िड्डंईदीलीगयाप्प्ा ेगीरजिपरयाहाराजयापढ़व (?) दर्यारिहृकमरलुनंगारीरुगनाप्परसुमालाभीलायइवर (?) अनिखीघनीरी रास्ुमाहाराजश्री अ्रुजीगरजीपजीनिरुकवर (?) वएीषी चारपिोजीएारीषवरीएाबीड़दारा अनिसीघ (?) जीरिसाप्पेदीलीप्पीजीएनिलागीजदइ्एिजाप भाहारजड़ु (?) यारनड़ीवी छ्ग्रेड़ीजापराद्आपन हीड्डरबिईएिजादइं (?) अनिसीघजीडुबपापि हिंगिंयुजीनराजजगावएा खरु्भ (?)
स्कैन १९ — ख्यात पत्र ८ (पृष्ठभाग)अनुमानित
वुक्षाकवरबांगख्रीघजी — १. 「…」 २. नारायणदायनी रएॉरगॉव चारी (?) परिहरच्वी ३. खुरसीघजी (ऊपर: पाल्वा (?)) ४. कीषमीघसजी ड़ीएा भेररदमलं (?)
क्नसीचजी खुरसीघजी गिदैंनु नाई माहाराजश्री खुरसी (?) घजीरीबंदगीभेंप्पा — क्षीरबादमा खुरजीघजनिग्भारारीपो (?) जीघीपीजरिआगजीहवीजीएमंजिहरी वरपा क्षीरइएांरा (?) नाइनिरायएद(यजील्ली सैांफवष्प (?)
रीएब्रोड्डदाप्पजी माहाराजस्री यर्बसीघंजी इनिघपीर्षि (?) दर्यार्वांष्ठरी — क्षीरस्तं कारीखुगनाप्पे क्षीरूगर्बसीघजी छ्व (?) रघदिंप्िड्डंई दीलीगयाप्प्ा — क्षीरजिपर माहाराजयापढ़व (?) दर्यारिहृकमरलुनंगारीरुगनाप्पर सुमालाभीलायइवर (?) 「…यह अंश स्कैन १८ की पुनरावृत्ति-सा प्रतीत होता है; मूल में पत्र-क्रम मिलाएँ…」

स्कैन १८–१९ में पाठ अत्यन्त सघन है और दो स्थानों पर समान अनुच्छेद दोहरे स्कैन के कारण दिख सकते हैं। मूल बही से पत्र-क्रम का मिलान आवश्यक।

स्कैन २० — ख्यात पत्र ९ (अग्रभाग), पत्रांक १७(?)अनुमानित
नदइर्एिांबषष दिबमीलाप भाराजन्नुरजीकीपायमगर्हिली (?) यरमें — जीरचीमघाबादरियोर्बे प्रिस्वीलंगर्बोनवाबमोरची (?) गबबर्इिाप बाद्मा हीछ कग्मोंनिनहीं जनि्यरवीषिव (?) रौरेानुबाद्माोगेीदघा बादरीयोबीघिंमपिय्ररपिखीच् (?) गर्षिरउरर्ुडुएां हिंाषारीनही नर्घिोन द्माहारजऊर्दिषि (?) जीनिषाद्याअेीयदाबादरीयोबाई नापर्ड्डीपे क्षीरमाहारन (?) जोध्रुरपघारीपा क्षीरर्जिघ्यायकर्यारायीर्ुरेंन्ुनिवाक्षि (?) ओख्रुरसापिड्डियेखांवंगषिमवुरछ हेजीज्यु यार खीरदार (?) हंमगीरहृपवालि जीएवबषखेंरीएबीड़ दयमनिवीषि (?) माहारसज्ञाबघुरमापिष्ठिरुप्पाराघयु ज्ञाद्मविध्या प्िवाले (?) नद्जिर्बदीबरत्रछ्ववी रुआाद्मीषांयुरुऱारा्ीघड़ई (?) ज्ञाबीरे दरवजिर्बोरिज़्रेटयोंमलहृव अेीमघबाइरगु (?) नबाबम्रुनगड़िह्वी सुरटिचारग्ग एपिांछ जीसुनीब (?) जगवुुरॉरेषिांमयर्इगिनिराषीपार्ईगपाइ म्िरवीकंग (?) चांनागि खीमघबाद्माड़ीवारसुड्डभाड़लापारु हाब्रु (?) नीबार्जचंमोनु देहरी मुएंगेहांइणिबंएीयुगाहारान भिहक्षीहृन (?)

इस पृष्ठ में “जोधपुर पधारीया”, “बादशाह”, “नवाब” जैसे शब्द बार-बार आते हैं — किसी सैन्य/दरबारी प्रसंग का वर्णन प्रतीत होता है।

स्कैन २१ — ख्यात पत्र ९ (पृष्ठभाग), पत्रांक १०अनुमानित
सर्व १६००° रीयाल भाराजस्री ग्रजेषिंघनजी वीड्डानेर पर शेजरवो (?) नेड्डीवीक्षोरपिऊेान्नीषघारीपाघाक्षीररीएा बीड्डदाप्पेजीनाभा (?) घेलीपा क्षीरवीड्डानेर वालांयुरागड़ोठ्वो रगे रीएा बीड्डदाप् (?) जीक्षीर जाल्वमसिंहजी (ऊपर: रे पावं दाना (?)) यावलदाप्पनी वाजने ड्डां मऊाध (?) इएणबएरीयुम्भारानमोरखांन रूुपवघाराभेगांव आफिइनायाल्हीवि (?) — आऊ

उप-सूची — रीणा बेड़दासजी(?) रे कुंवर री विगत अनुमानित

१. यावलदासजी/जावलदासजी (?)   २. अणदासजी (?)
३. रूपसीघजी (?)   ४. खिड़ूंपजी (?)
यावलदाप्पजी माहाराजस्री बघनासीघजी क्षीरसांमसीघजी (?) रिआपयर्पिंगिपिव्प्पा — क्षीरबघनसीघजी ज़िापघुरखेवणेरे ईहि (?) भेंप्पाजद यावलदाप्पजी ज़िापनजग्गुनरियोंभेंल्व दीषणीपिंर रिज्व (?) रांमसीघजी 「…」 मघामें ठ्वापा औीरसांमसीघजीरि ज्ञाध्ुाररीरनजबक्ष (?) रघपिाऊाषीरमिरेांगमसीघजी खुयीरघरॉरो घनद्िवटीभ्जिाल्ही (?) क्षीरसीबीषानमेंनारानड्डरदीपानिरसीरवाररयारा — ५ यनो (?) गोरखषनसीघनीकिंगपाक्षीरखघन सीघजीरिजोघघुर राम्रुख्वि (?)

इस पृष्ठ में “बीकानेर”, “जोधपुर”, “मोर खान(?)”, तथा “आफ़ि/आऊ” ग्राम-सन्दर्भ आते हैं — ठिकाणा आऊ की पट्टा-प्राप्ति का प्रसंग सम्भावित। यही पृष्ठ स्कैन ३२ में दोहराया गया है।

स्कैन २२ — ख्यात पत्र १० (अग्रभाग), पत्रांक ११(?)अनुमानित
यांवलदाप्पजी रिख्वरं वीगन (?)

उप-सूची — यावलदासजी(?) रे कुंवर अनुमानित

१. वुविक्षरएणजी/विक्रमजी (?) (टिप्पणी: राजा… (?))   २. भूरदायजी/भूरदासजी (?)   ३. अर्जुनशरणजी (?)   ४. जोगराजजी (?)   ५. 「बेटा…」दीपयोजी (?)
श्रीयी विक्षरएणजी माहाराजस्री बजिसीषजीर क्षीमेंनिरांमसीघजीरे चा (?) पयमेंकीाज्वगिाजनघ्ट्गोररिक्षावार — प्रबिदारीइजिरिघीक्षोरड़ी (?) घड्डुरेंख्वनतजीहनी वड़िसीघजी रीआमवहवीनघ्गारईउघर (?) शिजपिल्वुप्पिारांमर्सीघजी रीतरख्घुनिगीघायपयांिघएीजाड़ि (?) ल्रुापिपंब्ड़ावमेंयामोनखुयपिरिरांमर्सीघजीरीमखुदापद्द (?) हईनहीं जुद्धगजीड्डुरपीथांनाजनड्डेांपआपिखोतावगविपिंगवाब (?) व्रीवकरणएगाहाराजन बजिसीघजी रीघरजी युजख वालपि चोर (?) रुगयार्घुइुरॉर्व आपिजमें चारीकउिाहवोंधन खुरर घापजीवड्डुर (?) हिन्तु वजनेड्डेांपआप — घी वड्डुरएंजीरिख्वुरारी वीगन (?)

उप-सूची

१. अर्घीराजजी/अखीराजजी (?)   २. नागवनसिंहजी 「…」 (?)
अर्घीराजनजी माहाराजश्री जीतसीघजी वुनेबेदगीमिरपायीरील्व (?) जीघजी गोखुव क्षुजीगरांमाव क्षुएय चारीपाप्पाजे यरमाहाराजरेने (?) जोरखुं मानसिंहजी जाल्वीयु ेजआप्साजी मारीक्षो हूलीजबविनि (?) दुरएएचारे वाहर वलीपी जद्यो लीधोष नधामप्यइढड़े इनेगोर्वि क्षीर (?)
स्कैन २३ — ख्यात पत्र १० (पृष्ठभाग), पत्रांक १८–१९(?)अनुमानित
एलिरिख्वारखुुपजीघजीप्पां (?)
घदुपजीघजी माहाराजश्रीमांनासिंहजीरिघरजीयुजयखल्वीय (?) (ऊपर: घोरूनसापनी (?)) क्षीरस्ामनदरुडुगेंमे इृलोदीफेऊमव भ्रीयुर्खवाग्रूरी ऊवेर्पोपावत (?) ल्वाइजीघजीरीस्परपरखुं वीड्डानेरखालाआयाक्षीर रुगड़ोन (?) वोक्षीरदुपावन वीड्डानेरखांचायुभील्वगपाने घेरा नंगड्डीपो (?) जेयदुपजीच क्षेमऊँोयो — क्षीरदुपावगंभीड्डूनेरवांचोस्तोपन (?) गपाजीएंगरएंगवुलीपाजार: पुंलीह्वाघु: भुनाज्गार: वुगोरेनवर (?) घुर पानावुनेनेल्िषदिया: पानोवुन घेटयुराजरखोमघरजी (?) है क्षीरखुावुन पेटयु घरजीसगापवाजण वाच्राहें अीरइए (?) बेदरीदुइएंगेर (ऊपर: वुकारीयाच्रो (?)) गोवुनलीपाजर परेयमग — १५७(?) मे माहाराज स्री (?) मांनसिंहजी इनायनड़ीवी क्षीरइएंगरें ेख्वुर हरीपीघजीच्या (?)
हरीपीघजी नीऊआपरेवुड़ेरॉमुनयवाल्व व ल्वएराषीच्यार (?) वघारोम्भाराजस्रीमांनयीचजीवुनेखुं — िघिपापोपीगारी (?) बेदगीखुंजीएारीवीगनउेपारजाम्रुक्षीहें क्षीरहरीजीघजनी रोड (?) वरॉरीवीगननफ़्जीचवार: कील्गंएणदाप्पजी: रननघीघजी: (?)
स्कैन २४ — ख्यात पत्र ११ (अग्रभाग), पत्रांक २०(?) — अन्तिम पीढ़ियाँअनुमानित
द्विलाणसीघजी(?) वरो अंक्षचें वदधाक्षोद् नेष्वब लएराघीरएंगो (?) रेख्वुरॉ दल्वपनजीः हृ्मारारीउमलजी ः (?)
दल्वपनयीघजी(?) रिबेटा र्षे — १. भीमासिंहजी   २. वीरुदपजीघजी/वीरदत्तसिंहजी (?)   ३. हलुरुगघटिपजी (?)   क्षीरमालम मंगलसिंहजी (?)
मंगलसिंघजी रेटा वर रूगवोन हीनद नाए वीरुदपजीघजीने घोड़े (?) जीपा (?)
विड्डदसिंहजी 「…」 (?)

महफूज़ मे तवारीख़ अनुमानित

बाद मुबारजेगे हुक्ममहवारेक्षोमजरूयषघ (?) डेशरदरजरन्हिड्डिरघररेस्री दीजावे (?) रंशारमांप्वर्हिषएरो इ्वाचोआमदनरे ता २६ (?) जोनाइअिनश्रुइ। (?)
(हस्ताक्षर:) मोतीलाल श्रीमवम्रू (?)
विारदातावनृनचंतम्भोपवी (?) · प्लांपुनाल्वाल घ्रुऊजमवुदन्नो (?)

“महफूज़ मे तवारीख़” (सुरक्षित अभिलेख की तारीख़) अनुभाग तथा हस्ताक्षर — सम्भवतः अभिलेख के पंजीकरण/जमा होने की कार्यालयीन टिप्पणी, दिनांक “ता. २६ जून(?)” सहित। यह ख्यात की मुख्य वंश-सूची का समापन-बिन्दु प्रतीत होता है।

स्कैन २५ — नकल-खण्ड प्रारम्भ (पट्टां की नकलां बही)अनुमानित
(शीर्ष: नक़ल (?))
विक्रम/वक्षाभ महाराजाजी श्री मांनसिंधजी राषामरुऊ (?)
रांगेड़ हीरम्िधममरुभ्रुलिघीरादिमे (?) सुत्रभाद्यायजो रेनघोजीभीव्रनु (?) ल्गाजनेचागरजलुभवावुनवावं (?) रंयार्मावबाछु ऱेरक्रांनी भ्रे उपी (?) हमीरिघ्िराचान्नी जमीनलुभनि (?) जयजो 「…」 जीचाबीतरक्षरन्नो (?) (नीचे: रईोघने / नमुदैर (?))
(शीर्ष: नक़ल (?))
रांगेड़ हीरम्िधममरुभ्रुलिघीरादिमे (?) सुत्रक्षोद्खान्यज्ञी रेनघो नुंहेजेजम (?) रुघड़नंबलहीचाबीयार रइनलक्ष्मी (?) च्िमलीष लुननीजर रहमरिखुनीयांघने (?) २ग्रांगूघावुहृ (?)
(शीर्ष: नक़ल (?))
विक्षामगाहाराजाजी श्री तखनगिघघी रोपार्भ — ५३(?) (?)
「काली रेखा से काटा अंश」 「…」 वीरसषय सरुस्िघोर्ि 「…」 (?)
रुव्रें हाजर होजोमांरीमरजीहै आर्िं (?)

यहाँ से “नकलां बही” (आदेशों/पत्रों की प्रतिलिपियाँ) आरम्भ होती है। प्रत्येक नकल में महाराजा का नाम, प्राप्तकर्ता, विषय (चाकरी/जमीन/हाज़िरी) एवं संवत्-तिथि है — तिथियाँ मूल से पुष्ट कराएँ।

स्कैन २६ — नकल-खण्ड (क्रमशः)अनुमानित
(शीर्ष: गोख्री / गोख्रा (?) · नक़ल (?))
वक्षाभ महाराजाजी श्री मांनलिंघजी राषामरुऊ (?)
म्रमम्रत ब्िर दारा रीभे सुप्रक्षीह्वविजे (?) तघांवाह्वाह् घांराम्रामघरनपएा (?) नुनें घराएानू घाने रग्रोघरीनोर्घि (?) चीरजिए सुनवष्टीमजवुुवीरांष्िनि (?) ररराषम्रोसुरिवाजायगाप्यांनिम्रा (?) माक्षरहोमने ब्िरक्षामनंदगारहिमो (?) रोतनु नांक्षरखोजाल्जोरराघेरारीच (?) दग्रीघोरी जालाओ नेलिएलुजवर्व (?) सुन्नेरोठ्वाषवरखेओ नुंवज़्वेरीभार (?) रीचाकरीरत्रुनऋरखो छितीरुहु (?) कार्यजाएो जिभीरिनिवाजमरु भीषि (?) जमाषातरराषने रेरेमजलु रीविर्भ (?) राषनो छिएीरो विभवामश्रीजेमतो (?) रुलो घोपारि जरीलीठे मघो दे दीदार (?) एर्ठ आणो लिलु विमवामश्ररऱाईयो (?) मांनजोमती श्रीजी चावर्ष्िगाचाल (?) ऊरश्रीचांग किजेरीनिजाल्जोर भिवाएि (?) चाएभेंन गारीमजबुगीिं भवुरा उेजाबे (?)
स्कैन २७ — नकल-खण्ड (क्रमशः)अनुमानित
(शीर्ष: गोख्रा (?) · नक़ल (?))
माघराजाजी श्री जम्रमपालिघजीरिषि (?) म्रुदुक्षेरीनऊल (?)
गोवुचाछुरागांहनीश्रीघजीसुर्यो (?) रीरुघार्सावुजो रेतघांचव्यारचारे (?) हाचषास्वरीगरखल्वहेजीएलु (?) घांछनेभ्रेषनीजामदीनर्हिररूामे (?) नेर्मेजीमोहेभ्रीरुपीणा (११०°) हल (?) रईलारेपल्वे घालदीजो इरतमेघ्या (?) री(छुरी विंछ गीहें नेनी वाजम्भाववुभी (?) मारो हातावुषरत्रुवदीपालु जानजरुय (?) म्रुगायदे भारनेच्यारे घोड़ाच्यागेहै (?) मीचऋड्ड घोड़ो जाबोहुवेजीक्षोभे (?) जनो इरममो बारचंड्डम्री भ्रवत (?) 「…」 गाजेब सुद्धांे (?)
इलादुभ्रेशामुरु° चषरतीनिभी (?) हीनार्ब चाउमेनियुरीणा — ००° (?) मातम्रोजोधड्डरमेढीन्रक्षाजीर्न (?) छुनीपारिपल्ियाणीणा हेदरक्वामे (?) जीभांमव्वजी (२२०°) हज़ार हुक्षा (?) दीपाहांम्भुो नांरमन्वहाणेनांरमन्रुर (?)

इस नकल में घोड़े, रुपये (₹ अंक “११०”, “२२०” जैसे) व चाकरी सम्बन्धी हुक्म का उल्लेख है — जागीर-सेवा शर्तों की नकल प्रतीत होती है।

स्कैन २८ — नकल: श्री जलंधरनाथजी-प्रसंग पत्र (अग्र)अनुमानित
(शीर्ष: नक़ल — श्री जल्ंधरनाथजी महाराज री ब्िर (?))
(उप-शीर्ष: पानाबम्रह्म (?))
बरजोच्यांरीचाबी रीतमांल्वमहेतमे (?) घांतर रांघजो निवाजमहरूमी (?)
(मुहर-चिह्न: मोर (?))   महीपालरमप्रहारी (?)
ख्वाजाक्षश्रीराजराजेश्वर महाराजाधि (?) राज महारांजाश्री मांनसिंधजी महाराज (?) कुंवारश्री छतरसिंधजी वंमनांतरांगेड़° (?) हीरसिंधमरूसिंघोतनेकांभीदानमरूर् (?) रांमसिंधोतनन्नीरषसिंध सुदररामोरने (?) ररेसिंध रुमेंदे सिंधोतनेवाघसिंधमो (?) गरांमसिंधोतमममरापातावतांरीचामो (?) मीपारीमेंसुप्रमोद वांनजो रेतघांअवोधी (?) राजगछामिक्यानसिंध सुदरराभोरने (?) वीरनांएासिंधरांजीतनेजाल्वमसिंधर्खि (?) रसिंधोतनेजोधसिंध गनाड़सिंधा (?) भीरघरसिंध चाईवेसिंधोतनेछाधल्व (?) कगरेड़ांमचयामाने इरहीघंगेरहरीपो (?) जरछिरंतनमनलुबवरारिश्ररोहोनेवेर (?) वारे चांरोतोरेतौरे मुरावीठवुेसुमानमहें (?) सुन्नातनाराषातरजमेराषजो सुवैरो (?) ह्वानाक्षरीसुजवमारईनेनीवाजमे (?) चाबीतर छभीचाभ(सुरो जईनेमीरदर (?) स्रेवीदाश्रीपाहेंसु ह्वेिरुा छिखोघीनु (?) पाबोखुमऋरम्भारोवुिेवमतचांबी (?) वुरेक्षीजो। म्भवतवृड़ऊेरामिरो मीत्रुए (?) वहिरे च्यामसुक्षामघायतघतगर्व्रेघ्दछ (?)

यह नकल जोधपुर की पूर्ण राजकीय उपाधि-पंक्ति के साथ है — “ख्वाजा श्री राजराजेश्वर महाराजाधिराज महाराजा श्री मानसिंधजी… कुंवर श्री छतरसिंधजी…” तथा इसमें “पातावतांरी” शब्द स्पष्ट आता है — वंश-नाम की सीधी पुष्टि। “श्री जलंधरनाथजी महाराज” का उल्लेख महाराजा मानसिंह-काल की नाथ-परम्परा से मेल खाता है।

स्कैन २९ — नकल: श्री जलंधरनाथजी-प्रसंग पत्र (पृष्ठ), पत्रांक १३(?)अनुमानित
(शीर्ष: श्री जल्ंधरनोघजी महल्व (?))
(मुहर-चिह्न: मोर (?))   (उप-शीर्ष: माभरलक्षत (?))
ख्वाजाश्री राजराजेश्वर महाराजाधि (?) ज महाराजाश्री मांनसिंधजी महारांज (?) कुंवारश्री छतरसिंधजी क्षवनांतरांगेड़° (?) हीरसिंधमरूपसिंघोत ल्वीवसिंध सुदरहो (?) मोरादिभ्रीसुभ्रमराद वांनजो रेतघाहरो (?) रवीक्षनेरेरोमांधघांरागावुमेंश्िरीपो (?) जिएानिंशानचाछुभीघामाएगायानिगो (?) वर्घीगहीपान्िएरामम्भावार माल्जमहर्भे (?) मोरीक्षरूराषजोमतीड़ंएारोजाषरूयर्भे (?) जाम्भीनेच्यांरीषल्वरीहेंषातरजमेरोष्भी (?) घ्यारोक्षिपररहम्भीरेभ्रषतवुऽप्भार्भोख़ुहूँ (?) सुक्षामघायतघतगछ जोधछुर (?)

पूर्ववर्ती नकल का दूसरा रूप/पृष्ठ — वही राजकीय उपाधि-पंक्ति, “जोधपुर” स्थान-नाम सहित समापन।

स्कैन ३० — नकल: तीसरा जलंधरनाथ-पत्र, पत्रांक १४(?)अनुमानित
(शीर्ष: श्री जल्ंधरनांघजी मरतल्व (?))
(उप-शीर्ष: पानमखत्ता (?))
बछासिंधे हांसु माल्वमहेज माभानरनायमो (?) यरदामतनरहमी (?)
(मुहर-चिह्न: ख्वार (?))   महीपालरम्भक्षतारे (?)
(श्वाभ्रश्र) राजराजेष्वर महाराजाधिरा (?) ज महाराजाश्री मांनसिंधजी महारानई (?) वारश्रीछतरसिंधजी क्षवनांतरांगेड़ हीर (?) सिंधमरूसिंघोतर्िहेसिंधर्िमेंहे भी (?) घोरावांड़ीदाम्रमगरोनसिंघोतलुऱी (?) घबेरारसिंघोरान्वोमसिंधलुषसिंघोत (?) भ्रंममानपानावतंरिमेसुप्रमांड्डवार (?) जो रेतघांचाणेहीर्वड़णीड्डीवीमोगा (?) बीतरेमाल्वमहेनेहमार चांछीजमीर (?) सुरखोघीहोमोम्भारीअररमोहलोर (?) 「…」मारुगंगजम्रवीवीभोघोरीर्वएी (?) हेषातर खुम्भीराषजो रेभवरावुल्ब निर्ि (?) म्भांवुएायद्ेषे तुक्षाम घायत ष्तगढ जोध्ऱुर (?)

तीसरी नकल — इसमें भी “पातावतां” शब्द (“भ्रंममान पानावतंरि…” = सम्भवतः “मम मान पातावतां री…”) तथा समापन “जोधपुर” आता है।

स्कैन ३१(क) — “पीढ़ियां री बात” पत्रअनुमानित
(शीर्ष: 「…」रे गांव री बात — श्री महनाथ(?) रूयी नेरे पीढ़ीयां री बात (?))
श्री वना(प्पा)मल जी क्षो तस्वुल जरा (?)「…मल」जी रा: खुबजी (?)
「…」जी रा: इरनमल जरा: (?)इरनमल जरा: वीजड़ (?)
「…」जरा: वीजड़ जरा: ज्याएा दामरा: (?)
「…」र को वीजड़ भीजपत जरा: (?)जमएारामेएो 「…」 (?)
ऱुप तस्वुल जरा: आमरु रएएारा: (?)
ओक्षइ रएाजी क्षोंदर दाम जरा: (?)
क्षोंदरदाम जी रांश मीजरा: (?)
रांशामीजरा: रानम्भ्रुजरा: (?)
रानमीजरा: हजर ग्भुजरा: (?)
हजरम्भुजरा: पातसरा: (?)
पातोजरा: रीड़मलजरा: (?)

यह “पीढ़ियों की ख्यात रो पानो” प्रतीत होता है — “X जी रा: Y” शैली में क्रमबद्ध पितृ-वंश शृंखला, जिसका समापन “पातोजी रा: रीड़मलजी(?)” पर होता है। यही शृंखला मुख्य ख्यात के पातोजी/रीड़मलजी खण्ड से जुड़ती है। शृंखला के आरम्भिक नाम अत्यन्त अस्पष्ट हैं — विशेषज्ञ मिलान अनिवार्य।

स्कैन ३१(ख) — “घटीयाला री पीढ़ियां री विगत” पत्र, पत्रांक १५(?)अनुमानित
(शीर्ष: 「…」गांव घटीयल्वारी पीढ़ी तर्फि वरीरएएम्रुजब (?) — गांव घटीयाला री पीढ़ियां तर्फ़ विगत मूजब)
१. रूुरभीघजी राजभीजीरा (?)
२. रूुरभीजीर श्री बुंदन भीजी — श्री बुंदन भीजीरा 「…」 (?)
३. मभीघजी अमरांयभीघजी (?)
४. रावं कीका भजी वंकीदास भजी (?)
५. यरावा श्री घनीराय भीघजी (?)
६. राहर नाघ भीघजी हरनाथ भी 「…」 (?)
७. घराउ मंनयीघजी (?)
   — जोधसींघजी (?)
   — ईदरजी/इंदरसिंहजी (?)
   — सगरामसींघजी
   — नगसींघजी (?)
   — मोकमसींघजी
   — जुगतसींघजी
   — बख्तसींघजी (?)

अनुक्रमणिका के मद ५ (“घटीयाला री पीढ़ियां री विगत रो पानो”) से मेल खाता पत्र — गाँव घटीयाला की शाखा की पीढ़ी-सूची।

स्कैन ३२ — स्कैन २१ की द्वितीय प्रति (डुप्लिकेट)पुष्ट — दोहराव

यह छवि स्कैन २१ (पत्रांक १० — “सर्व १६००° रीयाल…” तथा रीणा बेड़दासजी रे कुंवरां री विगत) की ही दूसरी, कुछ अधिक स्पष्ट प्रति है। सामग्री हेतु स्कैन २१ देखें। प्रकाशन में एक ही बार सम्मिलित करें।

पुष्टि हेतु निर्देश Verification Instructions

उपरोक्त प्रतिलेख में केवल आवरण, अनुक्रमणिका, सूची-शीर्षक एवं कुछ स्पष्ट नाम ही “पुष्ट” स्तर के हैं; शेष समस्त गद्य-अंश अनुमानित पढ़त हैं। ठिकाणा आऊ के परिवारजन एवं वंश के जानकार कृपया: (१) प्रत्येक (?) चिह्नित नाम की शुद्ध वर्तनी बताएँ, (२) 「…」 चिह्नित अपठित अंशों को मूल बही (राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर — बस्ता १२, ग्रन्थांक ६१) से पढ़वाकर पूर्ण कराएँ, तथा (३) प्रत्येक सुधार के साथ प्रमाण (मूल पृष्ठ का छायाचित्र/सन्दर्भ अथवा पुष्टिकर्ता जानकार का नाम व सम्बन्ध) अवश्य भेजें। दो स्वतंत्र पुष्टियों के पश्चात ही यह पृष्ठ अंतिम रूप से प्रकाशित होगा।

Only the cover, index, list headings and a handful of clear names are at “confirmed” level; all prose passages are tentative readings. Corrections require evidence — an original bahi page photo/reference or attribution to a named knowledgeable elder. The page is published only after two independent confirmations.

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